इस्लाम में दया और करुणा का महत्व
इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो दया और करुणा के महत्व पर बहुत जोर देता है। कुरान और हदीस में कई आयतें और कथन हैं जो मुसलमानों को दूसरों के प्रति दयालु और करुणामय होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कुरान में दया और करुणा कुरान में, अल्लाह को सबसे दयालु और सबसे करुणामय के रूप में वर्णित किया गया है। मुसलमानों को अल्लाह के इन गुणों का अनुकरण करने और दूसरों के प्रति दयालु और करुणामय होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। कुरान में कई आयतें हैं जो दया और करुणा के महत्व पर जोर देती हैं। उदाहरण के लिए, सूरह अल-इंसान में, अल्लाह कहता है: "और वे भोजन की चाह होते हुए भी, निर्धन, अनाथ और बंदी को भोजन कराते हैं। (वे कहते हैं,) "हम तो तुम्हें केवल अल्लाह के लिए खिलाते हैं। न तुमसे कोई बदला चाहते हैं और न कृतज्ञता।" (76:8-9) यह आयत मुसलमानों को जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करती है, भले ही वे स्वयं जरूरतमंद हों। हदीस में दया और करुणा पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने भी दया और करुणा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा: "जो दूसरों पर दया नहीं कर...

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